why do I write ?
Tuesday, 1 July 2014
why do I write ?: Dabang sey dabboo tak..
why do I write ?: Dabang sey dabboo tak..: उम्र जैसे बीत गयी है एक पहेली के पीछे न जाने कितने पड़ाव आये जब दिल और दिमाग द्वंद्व करते रहे मगर सुकून नहीं मिल पाया .ज़िन्दगी में खुश रहने ...
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why do I write ?: why do I write ?: My Existence
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Sunday, 17 November 2013
Dabang sey dabboo tak..
उम्र जैसे बीत गयी है एक पहेली के पीछे न जाने कितने पड़ाव आये जब दिल और दिमाग द्वंद्व करते रहे मगर सुकून नहीं मिल पाया .ज़िन्दगी में खुश रहने के खोखलेपन ने मानो मेरी खिलखिलाहट को चीन लिया . क्यूँ नहीं वो सब कर पायी जो मेरे बस में था.
वो तमाम गुण थे जो मेरे सपनो को अंजाम दे सकते थे . मैं दबंग से दब्बू कब बन गयी पता नहीं चला . अरमानो का गला घुटता रहा मगर सिसकियों ने टूट कर बिखरने नहीं दिया .अपने वज़ूद , अपने अस्तित्व अपनी पहचान कि तलाश में न ही इतिहास को साक्षी बनाया न ही अतीत में दबे पन्नो को पलटने की कोशिश की.अपनी मेहनत पर भरोसा था और स्वाभिमान और सहनशक्ति का सहारा था जिसने मुझे यहाँ तक ला कर किस्मत से पुनः जूझने को झकझोर दिया है.
वो तमाम गुण थे जो मेरे सपनो को अंजाम दे सकते थे . मैं दबंग से दब्बू कब बन गयी पता नहीं चला . अरमानो का गला घुटता रहा मगर सिसकियों ने टूट कर बिखरने नहीं दिया .अपने वज़ूद , अपने अस्तित्व अपनी पहचान कि तलाश में न ही इतिहास को साक्षी बनाया न ही अतीत में दबे पन्नो को पलटने की कोशिश की.अपनी मेहनत पर भरोसा था और स्वाभिमान और सहनशक्ति का सहारा था जिसने मुझे यहाँ तक ला कर किस्मत से पुनः जूझने को झकझोर दिया है.
Tuesday, 28 May 2013
why do I write ?: My Existence
My Existence: A lonely evening, bright moon stood in the black dark sky,the branches appearing like veins and the leaves whispering as if not to dis...
why do I write ?: Leaving leaves......
Leaving leaves......: Have you ever felt the bonding of lively leaves with the stem.... they dance, they swing, they smile and grow with cheerfulness and warm...
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Why do I write..
what I feel I scribble...what ...: Why do I write.. what I feel I scribble...what I think I pen it...its a way to express and show the feelings which are genuine and cl...
Why do I write..
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